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24 जनवरी 2026

चालू पेराई सीजन में महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 41 फीसदी बढ़कर 69.73 लाख टन के पार

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 22 जनवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 40.92 फीसदी बढ़कर 69.73 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 49.48 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

 
शुगर कमिश्नर के अनुसार 22 जनवरी तक राज्य में 766.28 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 69.73 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.1 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 22 जनवरी तक कुल 199 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई शुरू की है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में भी इतनी ही चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई आरंभ कर दी थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 554.92 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 49.48 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 8.92 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 165.93 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 17.72 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.68 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं।

इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 176.92 लाख टन गन्ने की पेराई कर 16.58 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.37 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 47 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 30 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 164.77 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 13.53 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.22 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 26 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 11 प्राइवेट ने पेराई शुरू कर दी हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 94.35 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 8.13 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.62 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) ने पेराई शुरू कर दी है तथा उन्होंने 74.1 लाख टन गन्ने की पेराई कर 5.75 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.77 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 20 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 80.84 लाख टन गन्ने की पेराई कर 7.22 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.93 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 8.21 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा 7.29 लाख क्विंटल चीनी बनाई है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.88 फीसदी है।

आंध्र प्रदेश में कपास किसानों पर संकट, सीसीआई द्वारा भुगतान में की जा रही देरी

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के कपास उगाने वाले किसानों पर संकट बढ़ रहा है, क्योंकि कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने किसानों से खरीदे गई कपास की पेमेंट रोक दी है। हालांकि निगम ने सप्ताह भर के अंदर क्लीयरेंस का भरोसा दिया था। किसानों का आरोप है कि पेमेंट में बेवजह देरी की जा रही है और उनके पास पैसों की तंगी है, जबकि सीसीआई के अधिकारी बेनिफिशियरी की बैंक डिटेल्स में दिक्कतों का हवाला दे रहे हैं।


सीसीआई से जुडे सूत्रों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद सिस्टम के तहत कई किसानों के जनधन या पोस्ट-ऑफिस से जुड़े अकाउंट हैं, जो अक्सर इनएक्टिव होते हैं या बड़े ट्रांजैक्शन नहीं कर पाते। कई मामलों में, पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिलाओं को किसान बताया गया है, लेकिन उनसे जुड़े अकाउंट या तो डॉरमेंट रहते हैं या बड़े ट्रांजैक्शन लेने के लिए तैयार नहीं होते हैं।

अक्सर कपास के हर किसान की 2 रुपये लाख से ज्यादा की पेमेंट होती है, तो सीसीआई को गलत क्रेडिट से बचने के लिए सावधानी बरतनी पड़ रही है। अधिकारियों ने कहा कि गलत डिपॉजिट या फेल हुए ट्रांसफर से लंबी एडमिनिस्ट्रेटिव और कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं। सीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार अगर पेमेंट गलत तरीके से क्रेडिट हो जाती हैं या इनएक्टिव अकाउंट की वजह से अटक जाती हैं, तो उन्हें ठीक करना एक लंबा प्रोसेस बन जाता है। इसलिए, हम हर मामले को अच्छी तरह से वेरीफाई कर रहे हैं।

हालांकि, इस सफाई से किसानों की चिंता कम करने में कोई खास मदद नहीं मिली है। किसानों का तर्क है कि उन्होंने अच्छी नीयत से कपास दिया था और अंदरूनी बैंकिंग या डॉक्यूमेंटेशन की दिक्कतों की कीमत उन्हें नहीं चुकानी चाहिए। कई किसानों को गंभीर लिक्विडिटी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लोन चुकाना बाकी है और अगले फसल सीजन की तैयारी चल रही है। इस देरी की वजह से कई परिवारों को प्राइवेट पार्टियों से उधार पर निर्भर रहना पड़ा और जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। किसान यूनियनों ने मांग की है कि राज्य और केंद्र सरकार इस मुद्दे को जल्दी से सुलझाने के लिए कदम उठाएं। उन्होंने बताया कि पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिलाओं के नाम दिखना महिला किसानों को पहचानने के लिए पहले के पॉलिसी उपायों का हिस्सा था, और उसी हिसाब से पेमेंट को संभालने के लिए सही सिस्टम बनाए जाने चाहिए थे। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को संभालने के तरीके की आलोचना की, यह कहते हुए कि खरीद एजेंसियों, बैंकों और रेवेन्यू अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी से किसानों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार देरी से एमएसपी खरीद में भरोसा कम हो सकता है और किसान प्राइवेट व्यापारियों के पास वापस जा सकते हैं जो कम कीमत पर कपास खरीद रहे हैं।

सीसीआई अधिकारियों ने कहा कि अकाउंट वेरीफाई करने और पेमेंट में तेजी लाने के लिए बैंकों, पोस्ट ऑफिस और कृषि विभागों के साथ कोऑर्डिनेट करने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि अगर बकाया तुरंत जारी नहीं किया गया, तो देरी से राज्य में कपास की खेती पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई बढ़कर 651 लाख हेक्टेयर के पार - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली, 20 जनवरी। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 3.30 फीसदी बढ़कर 652.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 631.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  


कृषि मंत्रालय के अनुसार 16 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 137 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 133.18 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.66 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में घटकर 4.58 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में 4.88 लाख हेक्टेयर की तुलना में हो चुकी थी है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 96.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.33 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 58.72 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.93 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 22.54 लाख हेक्टेयर और मक्का की 27.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 23.85 और 25.05 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 7.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 25.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 20.98 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दिसंबर के दौरान डीओसी का निर्यात 40 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दिसंबर में डीओसी के निर्यात में 40 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 240,900 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल दिसंबर में इनका निर्यात 398,7361 टन का ही हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनें अप्रैल से दिसंबर के दौरान डीओसी के निर्यात में 5 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 2,975,739 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 3,150,678 टन का हुआ था।

घरेलू बाजार में सरसों की क्रशिंग में हाल ही में कमी आई है, तथा नई फसल की आवक फरवरी एवं मार्च में होगी। इसलिए नई फसल की आवक से पहले इसके निर्यात में, खासकर के चीन द्वारा किए जा रहे आयात में कमी आयेगी। इस समय भारतीय डीओसी की कीमत 250 एफओबी अमेरिकी डॉलर बोली जा रही हैं जबकि 14 जनवरी, 2026 को सरसों डीओसी हैम्बर्ग एक्स-मिल भाव 247 डॉलर डॉलर प्रति टन थी। अप्रैल से दिसंबर, 2025 के दौरान, देश से चीन को 685,049 टन सरसों डीओसी का निर्यात किया है, जबकि वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान केवल 26,327 टन (कुल 1,433,635 टन सरसों डीओसी का 48 फीसदी) का निर्यात किया गया था।

पिछले दो महीनों (नवंबर एवं दिसंबर’25) में सोया डीओसी का निर्यात 228,376 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि (नवंबर एवं दिसंबर’24) में इसका निर्यात 461,894 टन का हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यूरोप से लगातार सपोर्ट मिलने के बावजूद विश्व बाजार में इसकी कीमतों में मंदा आया है। पिछले दो सालों से, सोया डीओसी बनाने वालों को घरेलू बाजार में फीड बनाने वालों से कम डिमांड का सामना करना पड़ रहा है, जो सस्ते डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल (डीडीजीएस) को पसंद कर रहे हैं, जो मक्का और चावल जैसे अनाज से इथेनॉल बनाने के बाद एक बचा हुआ उत्पाद है।

भारतीय बंदरगाह पर दिसंबर में सोया डीओसी का भाव तेज होकर 396 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि नवंबर में इसका दाम 393 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान सरसों डीओसी का मूल्य दिसंबर में भारतीय बंदरगाह पर 217 डॉलर प्रति टन रहा, जबकि नवंबर में भी इसका भाव 217 डॉलर प्रति टन ही था। इस दौरान कैस्टर डीओसी का दाम नवंबर के 100 डॉलर प्रति टन से कमजोर होकर दिसंबर में 97 डॉलर प्रति टन रह गया।

मध्य जनवरी तक चीनी का उत्पादन 22 फीसदी बढ़कर 159 लाख टन के पार - इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 15 जनवरी तक देशभर में चीनी का उत्पादन 22 फीसदी बढ़कर 159.09 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 130.44 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन में 518 मिलों में पेराई चल रही हैं, जबकि पिछले सीजन में की समान अवधि में केवल 500 मिलें ही पेराई चल रही थी।

चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में 15 जनवरी 2026 तक 46.05 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो कि पिछले पेराई सीजन की तुलना में 3.23 लाख टन (लगभग 8 फीसदी) ज्यादा है। महाराष्ट्र में चालू सीजन में 64.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले सीजन की इसी अवधि की तुलना में लगभग 51 फीसदी अधिक है। राज्य में वर्तमान में 204 चीनी मिल चल रही हैं, जबकि पिछले साल इस समय केवल 196 मिलें चल रही थी।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 31.5 लाख टन चीनी का उत्पादन मध्य जनवरी तक हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 27.45 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। इसी तरह से गुजरात में चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक 3.86 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.73 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 1.85 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 1.30 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ था।

इस्मा के अनुसार अन्य राज्यों में चालू पेराई सीजन में 11.78 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 12.43 लाख टन की तुलना में कम है।

इस्मा के अनुसार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने की कीमतों में वृद्धि के बाद, बिहार सरकार ने भी हाल ही में गन्ने की कीमत में 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करके भाव 380 रुपये प्रति क्विंटल (जल्दी पकने वाली किस्म के लिए) कर दिया है। इस समय महाराष्ट्र और कर्नाटक में एक्स-मिल चीनी की कीमतें लगभग 3,550 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जो चीनी के मौजूदा की उत्पादन लागत की तुलना में काफी कम है।

जैसे, जैसे गन्ने का पेराई सीजन आगे बढ़ रहा है और चीनी का स्टॉक बढ़ता जा रहा है, इससे संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के पेमेंट का बकाया भुगतान भी मिलों पर बढ़ना शुरू हो गया है। अत: इस्मा ने कहा है कि बढ़ती उत्पादन लागत के हिसाब से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य, एमएसपी में बदलाव करना जरूरी है।

सीसीआई ने चालू सप्ताह में केवल 17,500 गांठ कॉटन की बिक्री की

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 12 जनवरी से 16 जनवरी के दौरान 17,500 गांठ, एक गांठ 170 किलो फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई कॉटन की बिक्री की। सीसीआई ने 5 जनवरी से 9 जनवरी के दौरान 2,23,100 गांठ की बिक्री की थी।


सूत्रों के अनुसार सीसीआई अभी तक पिछले फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई 98,70,800 गांठ कॉटन की बिक्री कर चुकी है। फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन की लगातार घरेलू बाजार में मिलों को बिकवाली कर रही है।

पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन में सीसीआई 72 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर कर चुकी है। माना जा रहा है कि निगम की कुल खरीद एक करोड़ पहुंचने का अनुमान है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में स्थिर से सुधार आया।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 200 रुपये तेज होकर दम 55,100 से 55,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव सुधरकर 5,500 से 5,660 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,460 से 5,600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,525 से 5,680 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 53,000 से 54,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 208,300 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 4.5 रुपये तेज होकर 1,590 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही, जबकि उत्तर भारत में इसकी कीमतों में स्थिर से सुधार आया। व्यापारियों के अनुसार अधिकांश मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है जबकि सूती धागे की स्थानीय मांग बराबर बनी हुई है, जिस कारण स्पिनिंग मिलें अच्छे मार्जिन में व्यापार कर रही है। हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन बेच रही है। अत: मिलों को आसानी से कच्चा माल मिल रहा है। हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी आई है। बढ़े दाम पर मिलों की खरीद सीमित हुई है इसलिए कॉटन के दाम रुक सकते हैं।

चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक चीनी का उत्पादन 22 फीसदी बढ़ा - एनएफसीएसएफ

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 15 जनवरी तक देशभर में चीनी का उत्पादन 21.63 फीसदी बढ़कर 158.85 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 130.60 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के अनुसार
15 जनवरी, 2026 तक देशभर की चीनी मिलों ने 1763.74 लाख टन गन्ने की पेराई की है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1484.04 लाख टन गन्ने की पेराई ही की थी। चालू पेराई सीजन में देशभर में 519 चीनी मिलों में पेराई चल रही है।

चालू पेराई सीजन में 15 जनवरी तक औसत चीनी की रिकवरी दर 9.01 फीसदी बैठ रही है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 8.80 फीसदी की बैठ रही थी।

एनएफसीएसएफ के अनुसार उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में मिलों ने 466.33 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा राज्य में चीनी का उत्पादन 45.70 लाख टन का हुआ है। राज्य में गन्ने में रिकवरी की दर 9.80 फीसदी की आ रही है। महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने अभी तक 717.78 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा राज्य में 64.60 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। राज्य में एवरेज रिकवरी की दर 9 फीसदी की आई है।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों ने 381.37 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा राज्य में 30.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य में चालू पेराई सीजन में रिकवरी की दर 8.05 फीसदी की आ रही है।

एनएफसीएसएफ के अनुसार चालू गन्ना पेराई सीजन के अंत (सितंबर 2026) तक कुल चीनी का उत्पादन 350 लाख टन होने का अनुमान है। इस दौरान इथेनॉल में करीब 35 लाख टन चीनी उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने की उम्मीद है। इस तरह से नेट उत्पादन 315 लाख टन का होने का अनुमान है।

प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 110 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 105 लाख टन, कर्नाटक में 55 लाख टन और गुजरात में 8 लाख टन के उत्पादन का अनुमान है।

चालू पेराई सीजन में चीनी की घरेलू खपत 290 लाख टन होने की उम्मीद है। इसके अलावा पेराई सीजन के आरंभ में 50 का स्टॉक बचा हुआ है। इस हिसाब से चीनी मिलों के गोदामों में नए सीजन के आरंभ में लगभग 75 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचेगा।